हरिद्वार/ऋषिकेश। (Forest Department Inspection in Haridwar and Rishikesh): वन उपज के अवैध भंडारण और व्यापार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में पंजीकृत लीसा इकाइयों के खिलाफ औचक निरीक्षण एवं तलाशी अभियान चलाया। मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल और वन संरक्षक, शिवालिक के निर्देश पर देहरादून और हरिद्वार वन प्रभाग की संयुक्त टीमों ने यह कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान भगवानपुर स्थित एक पंजीकृत लीसा डिपो में जांच के समय प्रतिष्ठान का स्वामी या अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद नहीं मिला। परिसर में रखे ड्रमों में विरोजा और तारपीन तेल पाया गया, लेकिन स्टॉक रजिस्टर, क्रय-विक्रय अभिलेख, परिवहन प्रपत्र समेत आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। (Forest Department Inspection in Haridwar and Rishikesh)
अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण मौके पर मौजूद वन उपज का सत्यापन नहीं हो पाया। इसके चलते विभाग ने सामग्री को अग्रिम आदेश तक विधिवत सीज कर दिया और आगे की जांच शुरू कर दी है। इकाई के स्वामी को आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह कार्रवाई उप प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून डॉ. उदय नन्द गौड़ के नेतृत्व में गठित 22 सदस्यीय संयुक्त टीम ने की। टीम में रेंज अधिकारी दीक्षा, रेंज अधिकारी मोहन सिंह रावत, रेंज अधिकारी महेन्द्र गिरी, उपराजिक गजेन्द्र समेत वन दरोगा और बीट अधिकारी शामिल रहे।
वहीं, दूसरी संयुक्त टीम ने उप प्रभागीय वनाधिकारी, रुड़की ज्वाला प्रसाद के नेतृत्व में लालतप्पड़, ऋषिकेश स्थित जय भारत रोज़िन एंड केमिकल्स प्रोडक्ट्स का निरीक्षण किया। यहां उपलब्ध वन उपज और संबंधित अभिलेखों की जांच की गई, जिसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं मिली।
वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन उपज के भंडारण, परिवहन और व्यापार से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों के लिए नियमानुसार अभिलेखों का रख-रखाव और निरीक्षण के दौरान उन्हें प्रस्तुत करना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन, अवैध भंडारण या व्यापार पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। (Forest Department Inspection in Haridwar and Rishikesh)
विभाग ने कहा है कि वन उपज के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण और वैध व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में भी ऐसे आकस्मिक एवं संयुक्त निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे।