Gorakhpur incident: सिद्धार्थनगर टंकी हादसा, 12 साल के किशोर की मौत, IAF ने 2 फंसे किशोरों को सुरक्षित निकाला

Please Share
गोरखपुर (Gorakhpur incident): उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की काशीराम आवास कॉलोनी में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां सोशल मीडिया रील बनाने के दौरान जर्जर पानी की टंकी पर चढ़े पांच किशोरों में से एक की मौत हो गई, दो घायल हो गए और दो टंकी पर फंस गए। बाद में भारतीय वायु सेना (IAF) ने हाई-रिस्क ऑपरेशन चलाकर दोनों फंसे किशोरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
पूरा मामला समझिए
12 साल का बाले चार दिन पहले अपने मौसेरे भाई दीपचंद के घर आया था। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे वह अपने दोस्तों, गोलू (15), सनी (11), कल्लू (15) और पवन (16), के साथ पास की जर्जर पानी की टंकी पर रील बनाने के लिए चढ़ गया।
कुछ देर बाद जब सभी नीचे उतरने लगे, तभी अचानक टंकी की पुरानी सीढ़ी टूट गई। इससे बाले, सनी और गोलू नीचे गिर गए, जबकि कल्लू और पवन ऊपर ही फंस गए। सीढ़ी का मलबा बाले के ऊपर गिरने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सनी और गोलू घायल हो गए।

Encounter: देहरादून में बड़ी मुठभेड़: प्रेमनगर में पुलिस बदमाश आमने सामने, एक बदमाश ढेर, थाना प्रभारी घायल

हादसे के बाद मचा हड़कंप
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बाले को मृत घोषित कर दिया।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा सूचना मिलते ही डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी अभिषेक महाजन समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
मलबा हटाने के लिए पोकलेन मशीन लगाई गई। टंकी पर फंसे दोनों किशोरों तक रस्सी के सहारे खाना और पानी पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें सुरक्षित नीचे उतारना संभव नहीं हो पा रहा था।
16 घंटे बाद IAF का रेस्क्यू
स्थिति गंभीर होने पर राज्य प्रशासन ने भारतीय वायु सेना से मदद मांगी। इसके बाद सेंट्रल एयर कमांड का Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा।
करीब 16 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद वायु सेना ने जोखिम भरे अभियान में दोनों किशोरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया और एयरलिफ्ट कर गोरखपुर लाया गया।

Video Kedarnath Dham: केदारनाथ के पास बर्थडे पार्टी पर बवाल, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

26 साल से बंद थी टंकी
बताया जा रहा है कि जिस पानी की टंकी पर बच्चे चढ़े थे, वह करीब 26 साल से बंद पड़ी थी। जर्जर हालत के चलते उसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि वहां किसी तरह का चेतावनी बोर्ड या रोकथाम की व्यवस्था नहीं की गई थी।
बाले (12): मोहाना थाना क्षेत्र के जुगलीपुर गांव का रहने वाला था। वह घर का इकलौता बेटा था, उसकी एक बड़ी बहन है और वह कक्षा 5 में पढ़ता था। गोलू (15): शास्त्री नगर का निवासी है। उसके पिता मजदूरी करते हैं। परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन हैं। सनी (11): मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के उरवलिया गांव का रहने वाला है। वह अपनी बहन के घर काशीराम आवास में आया था। दो भाइयों में सबसे छोटा है। कल्लू उर्फ साहबान (15): काशीराम आवास कॉलोनी का निवासी है। परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं। उसने चार साल पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। पवन (16): काशीराम आवास का ही निवासी है। परिवार में तीन भाई और एक बहन हैं। वह भी पढ़ाई छोड़ चुका है। घायल किशोरों का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है।
IAF की तत्परता की सराहना
इस पूरे ऑपरेशन ने एक बार फिर भारतीय वायु सेना की त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा के समय उनकी अहम भूमिका को साबित किया है।
Seaplane: भारत की पहली सीप्लेन एयरलाइन को DGCA की मंजूरी, लक्षद्वीप से शुरू होगी सेवा

You May Also Like